infosys Share Price : जानिए क्यों हो रहा है शेयर प्राइस डाउन
infosys Share Price : जानिए क्यों हो रहा है शेयर प्राइस डाउन |
निफ्टी आईटी इंडेक्स में शामिल टॉप 10 आईटी स्टॉक में बिकवाली का दबाव होने से पूरा इंडेक्स नीचे दिख रहा है. सुबह 10:15 बजे के आसपास ही आईटी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत टूटकर टॉप सेक्टर लूजर बना हुआ था.
निफ्टी आईटी इंडेक्स में शामिल टॉप 10 आईटी स्टॉक में बिकवाली का दबाव होने से पूरा इंडेक्स नीचे दिख रहा है. सुबह 10:15 बजे के आसपास ही आईटी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत टूटकर टॉप सेक्टर लूजर बना हुआ था.
निफ्टी आईटी इंडेक्स के 10 आईटी शेयरों में से एमफैसिस सबसे ज्यादा नुकसान में रहा. दोपहर 2 बजे के आसपास इसमें 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद पर्सिस्टेंट, एलटीआईएस, एलटीआईएम और Tech Mahindra में भी गिरावट देखी जा रही है. इनमें से प्रत्येक में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई. इसी समय के आसपास हैवीवेट टीसीएस और इंफोसिस में 3.50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.
एक्सेंचर शेयर प्राइस
आईटी सेक्टर की यह कमज़ोरी अमेरिकी बाज़ार में मंगलवार के कारोबार में एक्सेंचर के शेयरों में भारी बिकवाली के बाद देखी जा रही है. आज भारतीय आईटी शेयरों में गिरावट है. NYSE पर एक्सेंचर के शेयर 4.82 प्रतिशत गिरकर 337.04 अमेरिकी डॉलर पर बंद हुए, जिसका असर भारतीय आईटी स्टॉक पर देखा जा रहा है.
यह बिकवाली उन रिपोर्टों के बाद हुई है जिनमें कहा गया है कि डबलिन स्थित आईटी दिग्गज एनुअल प्रमोशन को छह महीने तक टाल सकता है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रमोशन को रोकने का निर्णय लंबे समय से चली आ रही मंदी का ताज़ा संकेत है जिसने कंसल्टिंग इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचाया है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में मामले से परिचित लोगों के हवाले से कहा गया है कि पिछले सप्ताह आईटी कंसल्टेंसी ने एक इंटरनल ब्लॉग पोस्ट में अपने कर्मचारियों से कहा था कि वह अधिकांश प्रमोशन की घोषणा दिसंबर के बजाय जून में करेगी. एक्सेंचर का प्रदर्शन भारतीय आईटी कंपनियों के लिए बेंचमार्क माना जाता है और उसकी किसी भी कमज़ोरी को भारतीय आईटी इंडस्ट्री की कमज़ोरी मानी जाती है.
रेवेन्यू गाइडेंस और डॉलर आय अनुमानों के अनुरूप न रहने के कारण आज यानी शुक्रवार को इंफोसिस के शेयर दबाव में है. आज यह आईटी स्टॉक कल के बंद भाव, 1,419.25 रुपये के मुकाबले कमजोरी के साथ 1385 रुपये पर खुला. बाजार खुलने के बाद एक बार यह दो फीसदी तक गिर गया. सुबह 11:10 बजे इंफोसिस शेयर एनएसई पर 14.02.20 रुपये (Infosys Share Price) पर कारोबार कर रहा था. पिछले एक महीने में इंफोसिस शेयर में 10 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं, साल 2024 में अब तक यह शेयर 9.50 फीसदी गिरा है.
क्या है एनालिस्ट्स की राय?
इंफोसिस को ट्रैक करने वाले 46 एनालिस्ट में से 32 ने इस शेयर पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है. 7 ने इसे ‘होल्ड’ करने की सलाह दी है और 7 ने ‘sell’ रेटिंग दी है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इंफोसिस शेयर पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है. ब्रोकरेज ने इस आईटी स्टॉक का टार्गेट प्राइस 1630 रुपये निर्धारित किया है. ब्रोकरेज फर्म सिटी ने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग दी है और टार्गेट प्राइस 1550 रुपये रखा है.
IEX Share Price: भारत सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी IEX (इंडियन एनर्जी एक्सचेंज) के निवेशकों को एक बार फिर से झटका लगा है। कंपनी के शेयरों में आज 12 फीसदी की बड़ी गिरावट आई। करीब 2 सालों की लंबी सुस्ती के बाद इस साल IEX के शेयरों में तेजी आनी शुरू हुई थी, लेकिन आज की गिरावट ने एक बार फिर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल है कि यह गिरावट आई क्यों? ऐसी खबरें हैं कि सरकार पावर एक्सचेंजों के लिए मार्केट कंपलिंग का नियम लागू करने की तैयारी में है। इसी नियम के चलते देश की सबसे बड़ी पावर एक्सचेंज, IEX के स्टॉक दबाव में आ गए हैं। लेकिन यह मार्केट कपलिंग का नियम है क्या? आइए जानते हैं। साथ ही जानेंगे कि IEX के कारोबार पर इसका क्या असर पड़ेगा और सरकार को इसके लागू करने में क्या फायदा है?
भारत में तीन पावर एक्सचेंज हैं। इनमें IEX के अलावा पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (PXIL) और हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज लिमिटेड (HPX) हैं। जैसे स्टॉक एक्चेंजों पर शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं, वैसे हीं पावर एक्सचेंजों पर बिजली खरीद और बेची जाती हैं। लेकिन जैसे आपने देखा होगा कि स्टॉक एक्सचेजों पर एक ही शेयर की कीमत में कुछ अंतर होता है। बीएसई और एनएसई पर एक ही शेयर के दो भाव होते हैं और उनमें कुछ पैसों का अंतर होता है। वैसे ही पावर एक्सचेजों पर भी होता है। यानी हर पावर एक्सचेंज पर इलेक्ट्रिसिटी की कॉस्ट, थोड़ी ही सही लेकिन अलग है। लेकिन इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार मार्केट कपलिंग लागू करने पर विचार कर रही है।
मार्केट कंपलिंग एक मॉडल है, जिसके तहत सभी पावर एक्सचेंजों पर Buy और Sell की आने वाली बोलियों को एक जगह इकठ्ठा करके मिलाया जाता है और फिर उसके आधार पर एक समान मार्केट क्लियरिंग प्राइस (MCP) तय किया जाता है। इससे सभी पावर एक्सचेंजों पर कारोबार हो रही बिजली की एक समय में एक ही कीमत होगी।
IEX यानी इंडियन एनर्जी एक्सचेंज को इसमें घाटा यह है कि अभी बिजली की लगभग 90% ट्रेडिंग IEX के प्लेटफॉर्म से होती है। दूसरे एक्सचेंज पर ट्रेडिंग ना के बराबर होती है। लेकिन मार्केट कपलिंग आने के बाद सभी जगह एक प्राइस होने से दूसरे एक्सचेंज का भी कारोबार बढ़ेगा। नए पावर एक्सचेंज भी खुलने का भी अवसर पैदा होगा। ऐसे में कंपनी का एकाधिकार कम हो जाएगा। इसीलिए शेयर पर दबाव है।
मार्केट कपलिंग को सरकार भी इसलिए भी लागू करना चाहती है क्योंकि वह लंबी अवधि के मौजूदा बिजली खरीद समझौते (PPA) के चलन को कम करना चाहती है, जो आमतौर पर 25 साल तक चलते हैं। सरकार को उम्मीद है इस नियम से एक्सचेजों पर बिजली की खरीदारी बढ़ेगी। साथ ही ट्रांसमिशन लाइन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
(Disclaimer: यहां बताए गए स्टॉक्स ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए लिए toofannews जिम्मेदार नहीं होगा.)
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